SIR में झूठी जानकारी देकर वोटरों के नाम हटवाना एक गंभीर अपराध
आदिल आलम : विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में झूठी जानकारी देकर वोटरों के नाम हटवाना और बीएलओ पर दबाव बनाना गंभीर अपराध और जांच का विषय हैं। राज्य के विभिन्न भागों से प्राप्त हो रही जानकारी के अनुसार राजस्थान में वर्तमान में चल रही SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की प्रक्रिया में कई अनियमितताएं सामने आ रही हैं। फॉर्म नम्बर 7 के माध्यम से कुछ लोगों द्वारा झूठी व भ्रामक जानकारी देकर वोटर लिस्ट में आपत्तियाँ दर्ज कराई जा रही हैं, और बीएलओ पर दबाव बना कर सही वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के आदेश दिए जा रहे हैं। यह अत्यंत चिंताजनक हैं इस प्रक्रिया का दुरुपयोग कर विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों में भय, असुरक्षा और भ्रम का माहौल पैदा हो रहा है। वोट का अधिकार भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त एक मौलिक अधिकार है, और उसे साज़िश के तहत छीनने की कोई भी कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है और लोकतंत्र को कमज़ोर करने वाला कृत्य है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जाँच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन सा गिरोह या कौन से तत्व संगठित रूप से इस प्रकार की झूठी आपत्तियाँ दर्ज करा रहे हैं। दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध सख़्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह लोकतांत्रिक व्यवस्था से खिलवाड़ करने का साहस न कर सके। राज्य के सभी जिला एवं तहसील निर्वाचन अधिकारियों से आग्रह है कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी मतदाता का नाम केवल झूठी या अप्रमाणित शिकायत के आधार पर न काटा जाए। इस संबंध में BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएँ और उन्हें इसके लिए पाबंद किया जाए, ताकि किसी भी निर्दोष नागरिक के अधिकारों का हनन न हो। साथ ही राज्य में जहाँ कहीं भी बीएलओ द्वारा दी गई सही जानकारी को बदलने और वैद्य वोटर को हटाने का दबाव प्रशासनिक या राजनितिक द्वारा बीएलओ पर बनाया जा रहा है। यदि कोई प्रशासनिक अधिकारी ऐसा करता है तो उसे तुरंत निलम्बित किया जाए और एसे राजनेताओं पर भी पर क़ानूनी कार्यवाही की जाए। मैं चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन से अपेक्षा करते हैं कि वे इस गंभीर मामले को पूरी संवेदनशीलता, निष्पक्षता और संवैधानिक दायित्व के साथ लें। साथ ही मेरी लोगों से भी अपील की है कि एक जागरूक नागरिक तरह अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए अपने क्षेत्र के बीएलओ और संबंधित अधिकारियों से सम्पर्क करके यह सुनिश्चित करें कि वोटरों के नाम लिस्ट में सही दर्ज किए गए हैं और किसी के नाम को अवैध रूप से काटा नहीं गया है।

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